पहले रामकोट थाने के मेडिकल जिला अस्पताल में होते थे। सीएमओ ने मेडिकल के लिए रामकोट को खैराबाद सीएचसी से संबद्ध कर दियाथा। यह निर्णय पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया। रामकोट थाना क्षेत्र सदर तहसील, मिश्रिख, महोली में विभाजित है। कुछ हिस्सा सिटी मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में है। अगर मिश्रिख तहसील क्षेत्र का अभियुक्त है, तो मेडिकल के लिए खैराबाद 24 किलोमीटर जाना पड़ता था। फिर खैराबाद से मिश्रिख 36 किलोमीटर, कुल 60 किलोमीटर दूरी तय कर एसडीएम के समक्ष अभियुक्त को पेश करना होता था। महोली तहसील का अभियुक्त है तो पहले 24 किलोमीटर खैराबाद फिर खैराबाद से महोली 36 किलोमीटर कुल 60 किलोमीटर का चक्कर लगता था। अधिक समस्या जमीन के विवाद में धारा 145 व धारा 133 के मामले में गिरफ्तारी में होती थी। अभियुक्तों को मेडिकल के बाद ही एसडीएम के समक्ष पेश करना होता था। पुलिस कर्मी पूरा दिन अभियुक्तों को लेकर चक्कर काटते थे।

जमीन के मुआवजे की बात ज्यों की त्यों, राजमार्

जागरणसंवाददाता,यमुनानगर:कैलसेपांवटासाहिबतकबननेवालेराजमार्गसंबंधीकिसानोंकीसमस्याओंकोलेकरनेशनलहाइवेअथोरिटीकेप्रोजेक्टडायरे

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मन्दसौर:मप्र:,16जुलाई:भाषा:पटेलनवनिर्माणसेनाकेराष्ट्रीयअध्यक्षएवंपाटीदारआरक्षणआंदोलनकेनेताहार्दकिपटेलनेआजसरकारसेकहाकिदेश

बनसिमली पुल को संपर्क पथ का इंतजार

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राजनेता बनने के लिये किसी ट्रेनिंग की जरूरत न

गुजरातकेमुख्यमंत्रीनरेंद्रमोदीनेकहाहैकिराजनीतिऐसाक्षेत्रहै,जिसमेंप्रवेशकेलियेकिसीप्रशिक्षणकीजरूरतनहींहै.एककार्यक्रममेंशि

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संवादसहयोगी,रादौर:रादौरकोउपमंडलकादर्जामिलेचारवर्षसेअधिककासमयबीतचुकाहै।बावजूदइसकेयहांकोर्टस्थापितनहींकीजासकीहै।उपमंडलबनने