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संवादसूत्र,लहरागागा(संगरूर):

गांवलहलकलांमेंकोटड़ारजबाहेमेंदरारपड़नेसेआसपासकीकरीबपंद्रहएकड़गेहूंकीफसलडूबनेसेखराबहोगई।किसानराजसिंहनेबतायाकिरातकेसमयअचानकरजबाहेमेंकरीबदसफीटलंबीदरारपड़नेसेकिसानजरनैलसिंहकीआठएकड़,किसानबलदेवसिंहकीपांचएकड़औरगुरदेवसिंहकीतीनएकड़गेहूंकीफसलडूबगई।किसानोंनेकहाकिवहगेहूंकोदोदिनबादपहलापानीलगानेवालेथे,लेकिनजलभरावहोनेसेफसलखराबहोचुकीहै।अबखेतकोदोबाराजोतकरगेहूंकीबुवाईकरनीहोगी,जिसमेंकरीबदस-पंद्रहदिनोंकासमयलगजाएगा।इससेफसलकीपैदावारपरबुराअसरपड़ेगा।

इसमौकेपहुंचेनहरीविभागकेजेईअमनदीपसिंहनेकहाकियूंतोरजवाहेकाकहींकोईकमजोरहिस्सानहींहै,लेकिनठंडबढ़नेकेकारणकिसानोंकेखेतोंसेचूहेवअन्यजीवरजवाहेकेकिनारोंमेंअपनेबिलबनालेतेहैं।उनकीखुदाईकेकारणरजवाहेमेंदरारेंपड़जातीहैं।उन्होंनेकिसानोंकोआश्वासनदिलायाकिवहजल्दलेबरकेजरिएबांधकोऔरमजबूतकरवाएंगे,ताकिकिसानोंकोगेंहूकेसीजनदौरानसिचाईकरतेसमयकोईपरेशानीनहो।