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प्रियंकाकाकोदकर,मुंबई2014से2015केबीचकिसानोंकेआत्महत्याकरनेकेमामलोंमें42पर्सेंटकाइजाफाहुआहै।नैशनलक्राइमरेकॉर्ड्सब्यूरो(एनसीआरबी)कीओरसेजारीआंकड़ोंसेइसबातकाखुलासाहुआहै।इसकेमुताबिक,2014मेंकिसानोंऔरखेतीकेपेशेपरआश्रित5650लोगोंनेसूइसाइडकिया।ताजेआंकड़ोंमेंयहबढ़कर8007होगया।बतादेंकिदेशकेकईराज्योंको2014और2015मेंभीषणसूखेकासामनाकरनापड़ाथा।इनमेंमहाराष्ट्रभीशामिलहै,जहांलगातारदोसालोंतकसूखेकाप्रकोपरहा।किसानोंकेसूइसाइडकरनेकेसबसेज्यादा3030मामलेमहाराष्ट्रमेंसामनेआएजोकुलमामलोंका37.8पर्सेंटहै।तेलंगाना1358मामलोंकेसाथनंबरदोजबकिकर्नाटक1197आत्महत्याओंकेसाथतीसरेनंबरपरहै।महाराष्ट्र,तेलंगाना,आंध्रप्रदेश,मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़औरकर्नाटकमेंकुल94.1पर्सेंटआत्महत्याकेमामलेहुए।जिनराज्योंमेंकिसानोंकेसूइसाइडकरनेकेएकभीमामलेदर्जनहींहुए,उनमेंबिहार,पश्चिमबंगाल,गोवा,हिमाचलप्रदेश,जम्मूऔरकश्मीर,झारखंड,मिजोरम,नगालैंडऔरउत्तराखंडशामिलहै।रिपोर्टकेमुताबिक,बीतेदो-तीनसालोंमेंमॉनसूनबेहदखराबरहा।इसवजहसेकिसानीकेक्षेत्रसेजुड़ेलोगोंकेसामनेबड़ीमुश्किलेंपैदाहोगईं।एनसीआरबीकेआंकड़ोंसेजिससमयावधिमेंकिसानोंद्वाराआत्महत्याकेमामलोंमेंतेजइजाफादेखागया,वहींकृषिकेक्षेत्रमेंकामकरनेवालेमजदूरोंकीआत्महत्याकेमामलोंमें31.5%कीगिरावटदर्जकीगई।कृषिश्रमिकोंकीकैटिगरीको2014मेंजोड़ागयाथा।एनसीआरबीकेइसफैसलेकीतीखीआलोचनाहुई।आरोपलगायागयाकिकिसानोंकेसूइसाइडकेमामलेकमकरकेदिखानेकेलिएऐसाकियागया।2014मेंजहांकृषिश्रमिकोंकीआत्महत्याके6710मामलेसामनेआए,वहीं2015मेंयहआंकड़ाघटकर4595होगया।अंग्रेजीमेंपूरीरिपोर्टपढ़नेकेलिएयहांक्लिककरें